बिहार में शराब बंदी 2023 | Bihar Me Sharab Bandi हिन्दी में जाने

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बिहार में शराब बंदी 2023 | Bihar Me Sharab Bandi कब हुआ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हिन्दी में जाने

बिहार में 2016 में शराब बंदी कानून बनाया गया, जिसके बाद शराब की खरीद बिक्री पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में की गई शराबबंदी का समर्थन राज्य के निवासियों ने पुरजोर तरीके से किया, खासकर राज्य के महिलाओं ने,

प्राचीन समय से ही सभी मुख्य अवसरों जैसे विवाह, मुंडन, वर्षगांठ आदि अवसरों पर शराब या मदिरा का सेवन करके लोग अपनी खुशी जाहिर करते थे। पुरुष वर्ग के साथ ही युवाओं में भी शराब के प्रति आकर्षण बढ़ता चला गया।

बिहार में शराब बंदी का कारण

इससे युवा अपने करियर पर ध्यान न देकर केवल शराब/नशाखोरी का सेवन कर इधर उधर भटक रहे थे। पुरुष अपनी आय का अधिकांश हिस्सा अपने परिवार या बच्चों की शिक्षा पर न लगाकर केवल शराब के पिछे लगा देता था।

Bihar Me Sharab Bandi

इन परिस्थितियों के कारण सबसे अधिक महिलाए प्रभावित हो रही थी। पुरुष शराब पीकर आता और घर की औरतों के साथ मारपीट करता, घरेलू हिंसा की स्थिति हमें हर घर में कमोबेश देखने को मिल रही थी।

इन्ही कारणों को देखते हुए श्री नीतीश कुमार ने राज्य में शराबबंधी को लागू किया, जिसका सबसे अधिक समर्थन महिलाओं ने किया।

2016 में शराबबंदी के बाद बिहार देश के गिने चुने राज्यों में शामिल हो गया जहाँ शराब पूर्णतः प्रतिबंधित है।

बिहार में शराब बंदी का असर

मौजूदा कानून के अनुसार शराब पीने पर दो से पाँच हजार जुर्माना लगया जा रहा है। बार-बार शराब पीते हुए पकड़े जाने पर एक वर्ष जेल की सजा का प्रावधान है।

इतना मजबूत कानून होने के बाद भी हमें जमीनी स्तर पर कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है। राज्य के लोग आज भी शराबबंदी के बावजूद बड़ी मात्रा में शराब पीते हुए पकड़े जा रहे है।

आये दिन शराब के तस्कर पकड़े जा रहे है फिरभी शराब की बिक्री हमें दिख ही जाती है। अब तो लोग दुगुनी-तीनगुनी राशि खर्च करके शराब पीते है। परिस्थितियाँ बद से बदतर होती जा रही है।

अखबार रेडियो टीवी पर हमें हमेशा देखने सुनने को मिल जाता है कि लोग जहरीली शराब पीकर मर रहे है। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि शराबबंदी बिहार में पूर्णतः असफल होता जा रहा है। शराबबंदी के कारण राज्य के राजस्व में भी भारी कमी हमें देखने को मिली।

Conclusion

अतः केवल कागजी कानून बनाने से ही शराबबंदी सफल नहीं होगा। इसके लिए सरकार और प्रशासन को लोगों को शराब के नुकसान के बारे में समझाकर इस पर प्रतिबंध लगाना होगा। लोगों को भी अपनी मानसिकता बदलनी होगी और अपनी आय को अपनी विकासात्मक कार्यों पर खर्च करना होगा न कि शराब पर।

तब जाकर कही बिहार में शराबबंदी कानून सफल हो………………………।

अस्वीकरणः इस पोस्ट में दी गयी जानकारी केवल एक राय मात्र है। जिसकी पुष्टी वेबसाईट एवं लेखक द्वारा नहीं की जा रही है।

FAQs on Bihar Me Sharab Bandi

प्र. बिहार में सबसे पहले दारू कब बंद हुआ था?

उ. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत अप्रैल 2016 में बिहार राज्य में शराबबंदी लागू की थी.

प्र. बिहार में शराब पर प्रतिबंध किसने लगाया?

उ. बिहार में अप्रैल 2016 में नीतीश कुमार की सरकार द्वारा शराब की बिक्री और खपत पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था.

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