Mrityu Satya Kintu Parishtithi Virah Vedna Ashanti Ka Karan » Hindi Me Jane

मृत्यु सत्य,  किन्तु मृत्यु का कारण, परिस्थिति, घटनाक्रम, समय, उत्तरदायी बिन्दु, विरह वेदना एवं अंशाति की जननी भी है।   

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मृत्यु का समय   

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असामयिक मृत्यु, जन्म एवं जीवन के औचित्य पर बड़ा प्रश्न चिन्ह दर्शाता है अर्थात-जीवन के पूर्ण अवधि का अधूरा रह है

मृत्यु का समय   

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-जीवन के पूर्ण अवधि का अधूरा रह जाना जीवन के उद्येश्य को पूरा नहीं करता है। जैसे किसी प्रायश्चित के लिए जीवन को दर्शाता है

मृत्यु के उत्तरदायी   

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मृत्यु सत्य है, निश्चित भी है, किन्तु इसे सत्य बनने में जो अनभिज्ञ उत्तरदायी होते है उनकी अपराधबोध से मुक्ति की अवधि में उत्पन्न पीड़ा एवं विरह वेदना क्या इसके भाग है 

मृत्यु की परिस्थिति   

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मृत्यु के सत्य होने समय की परिस्थिति में उपस्थिति मानवमन की वेदना, पीड़ा को देखने से उत्पन्न विचार के पश्चात दुख एवं पीड़ा का अनुभव क्या उस मृत्यु के भाग है